बेल/बिल्ब/बील के फल और पत्तों का उपयोग
बेल/बिल्ब या बील
यह प्रायः समुद्र तल से 4000 फुट ऊँचे पहाडों पर पाया जाने वाला पेड है इसके अलावा यह पेड भारत देश में हिंदू धर्मावल्म्विंयों द्वारा सभी मंदिरों के पास उगाया जाता है।
हिंन्दू लोग बेल के पेड की जडों में शंकर जी का निवास मानते हुये इसकी शिव के रूप में पूजा करते हैं साथ ही साथ बेल की तीन पत्तियों युग्म को शंकर जी के शिर पर चढाते है जिसका श्रावण मास व सोमवार के दिन विशेेष महत्व होता है।
पेड का आकार_
बेल का पेड लगभग 15 से 30 फुट ऊँचा होता है। बेल की डालियां काँटों से युक्त होती हैं। इसके पत्ते तीन पत्तियों के समूह में होते हैं।
फल_
बेल के फल का ऊपरी खोल नारियल के खोल की तरह कठोर होता है जो अंदर से गूदे और बीजों से भरा होता । यह फल मार्च से मई के बीच पक करनीचे गिरने लगते हैं। फलों के गूदे का शरबत बनाकर पीया जाता हैं। जिसमें प्रचुर मात्रा में बिटामिन c पाया जाता है। बेल का शरबत कई प्रकार के रोगों में फायदेमंद सावित होता है। यह शरीर की आंतरिक गर्मी को दूर करता है। मुंह के छालों को मिटाने के लिये भी इसका जूस लिया जाता है। पेचिस या दस्तों को रोकने व गैस एवं एसिडिटी को भी कम करता है। नियमित कुछ दिन तक सेवन करने से बेल फल हमें कई प्रकार के शारीरिक लाभ देता है।
हानि_
गर्भवती महिलाऔं को इसके अधिक सेवन से बचना चाहिये।
यह प्रायः समुद्र तल से 4000 फुट ऊँचे पहाडों पर पाया जाने वाला पेड है इसके अलावा यह पेड भारत देश में हिंदू धर्मावल्म्विंयों द्वारा सभी मंदिरों के पास उगाया जाता है।
हिंन्दू लोग बेल के पेड की जडों में शंकर जी का निवास मानते हुये इसकी शिव के रूप में पूजा करते हैं साथ ही साथ बेल की तीन पत्तियों युग्म को शंकर जी के शिर पर चढाते है जिसका श्रावण मास व सोमवार के दिन विशेेष महत्व होता है।
पेड का आकार_
बेल का पेड लगभग 15 से 30 फुट ऊँचा होता है। बेल की डालियां काँटों से युक्त होती हैं। इसके पत्ते तीन पत्तियों के समूह में होते हैं।
फल_
बेल के फल का ऊपरी खोल नारियल के खोल की तरह कठोर होता है जो अंदर से गूदे और बीजों से भरा होता । यह फल मार्च से मई के बीच पक करनीचे गिरने लगते हैं। फलों के गूदे का शरबत बनाकर पीया जाता हैं। जिसमें प्रचुर मात्रा में बिटामिन c पाया जाता है। बेल का शरबत कई प्रकार के रोगों में फायदेमंद सावित होता है। यह शरीर की आंतरिक गर्मी को दूर करता है। मुंह के छालों को मिटाने के लिये भी इसका जूस लिया जाता है। पेचिस या दस्तों को रोकने व गैस एवं एसिडिटी को भी कम करता है। नियमित कुछ दिन तक सेवन करने से बेल फल हमें कई प्रकार के शारीरिक लाभ देता है।
हानि_
गर्भवती महिलाऔं को इसके अधिक सेवन से बचना चाहिये।
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