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Showing posts from April, 2020

भारतीय अभिनेता ऋषि कपूर का जीवन परिचय

मूल नाम_ ऋषि कपूर ऋषि कपूर के पिता क नाम_ राजकपूर कपूर का जन्म 04 सितम्बर 1952 को हुआ था। ऋषि कपूर का गुरुवार दोपहर चंदनवाड़ी श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। यहां उनकी पत्नी नीतू कपूर और बेटे रणबीर कपूर समेत करीब 24 लोग मौजूद थे। उनकी बेटी रिद्धिमा कपूर साहनी दिल्ली में हैं। उन्होंने पहले डीजीसीए से चार्टर प्लेन से जाने की मंजूरी मांगी थी, जो नहीं मिल सकी। अब दिल्ली पुलिस ने उन्हें सड़क के रास्ते जाने की मंजूरी दी है। रिद्धिमा 1400 किमी का सफर सड़क के रास्ते तय करेंगी। इसलिए पिता के अंतिम संस्कार के वक्त वे मुंबई नहीं पहुंच सकीं। ऋषि कपूर का गुरुवार दोपहर चंदनवाड़ी श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। यहां उनकी पत्नी नीतू कपूर और बेटे रणबीर कपूर समेत करीब 24 लोग मौजूद थे। उनकी बेटी रिद्धिमा कपूर साहनी दिल्ली में हैं। उन्होंने पहले डीजीसीए से चार्टर प्लेन से जाने की मंजूरी मांगी थी, जो नहीं मिल सकी। अब दिल्ली पुलिस ने उन्हें सड़क के रास्ते जाने की मंजूरी दी है। रिद्धिमा 1400 किमी का सफर सड़क के रास्ते तय करेंगी। इसलिए पिता के अंतिम संस्कार के वक्त वे मुंबई नहीं पहुंच सकी...

अभिनेता इरफान खान का जन्म-मृत्यु

         हिन्दी फिल्मी जगत् के जाने पहचाने अभिनेता इरफान खान ने  बाॅलीबुड की फिल्मों में खूब तहलका मचाने के साथ साथ साउथ इनडियन फिल्मों में भी अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया ।  साल 1998 में फिल्म सलाम बॉम्बे से करियर शुरू करने वाले इस एक्टर के बारे में किसी ने नहीं सोचा था कि वो हॉलीवुड तक को अपनी एक्टिंग का दीवाना बना देगा. हॉलीवुड में उन्होंने माइटी हार्ट और जुरासिक पार्क जैसी ऐतिहासिक फिल्मों में काम किया.            साहबजादे इरफान अली खान टेलीविजन शो से सुरूआत कर हिन्दी अंग्रेजी फ़िल्मों, व टेलीविजन के एक कुशलअभिनेता रहे हैं।  फिल्मेें_           उन्होंने द वारियर, मकबूल, हासिल, द नेमसेक, रोग अंग्रेेेजी मीडियम, हिन्दी मीडियम, पान सिंह तोमर जैसी 50 से अधिक फिल्मों मे अपने अभिनय का लोहा मनवाया।  पुरस्हाकार_सिल फिल्म के लिये उन्हे वर्ष २००४ का फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ खलनायक पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। मृत्यु:_              29 अप्रै...

सीखना और सिखाना

सीखना और सिखाना        दोनों ही शब्द एक दूसरे के पूरक हैं ।हम जानते हैं कि मानव तो क्या दुनिया का कोई भी जीव अपनीं माँ के पट से कुछ भी सीख कर नहीं आता, वह जो भी सीखता इस जमींन पर कदम रखने के बाद ही सीखता है।        इन्सान जन्म से लेकर मृत्यु तक हमेेशा, हर पल, कुछ_ना_कुछ  सीखता ही रहता है। जीवन पर्यन्त इन्सान के ज्ञान में वृद्धि होती ही रहती है। वह हमेशा कुछ नया करता है व करने की कोशिश करता रहता है। सीखने के प्रकार_ 1. नकल से 2. अकल से ( प्रक्टिकली) 1. नकल से_ कोई भी इंसान भगवान/अल्लाह/ईसा का अवतार नहीं जो जन्म से ही सबकुछ सीख कर इस जमीं पर आये। बच्चा पैदा होने के बाद अपने आसपास के लोगों व वहाँ के बाताबरण से वहुत कुुछ  उनकी नकल कर के ही सीखता है।  हमने देखा है कि बच्चे जैसा उनके रिस्तेेेेदार बोलते हैं बैसा ही बोलकर उन्हेें चिडाते हैंं, इससे स्पष्ट होता है कि बच्चे नकल से सीखते हैं।         दूसरा पडाब सुरू होता है शाला के दाखिले से शाला में भी बच्चे अधिक_से_अधिक अध्यापकों की नकल करके ही सिखते हैं। क्योंकि ...

बेल/बिल्ब/बील के फल और पत्तों का उपयोग

बेल/बिल्ब या बील यह प्रायः समुद्र तल से 4000 फुट ऊँचे पहाडों पर पाया जाने वाला पेड है इसके अलावा यह पेड भारत देश में हिंदू धर्मावल्म्विंयों द्वारा सभी मंदिरों के पास उगाया जाता है। हिंन्दू लोग बेल के पेड की जडों में शंकर जी का निवास मानते हुये इसकी शिव के रूप में पूजा करते हैं साथ ही साथ बेल की तीन पत्तियों युग्म को शंकर जी के शिर पर चढाते है जिसका श्रावण मास व सोमवार के दिन विशेेष महत्व होता है। पेड का आकार_ बेल का पेड लगभग 15 से 30 फुट ऊँचा होता है। बेल की डालियां काँटों से युक्त होती हैं। इसके पत्ते तीन पत्तियों के समूह में होते हैं। फल_   बेल के फल का ऊपरी खोल नारियल के खोल की तरह कठोर होता है जो अंदर से गूदे और बीजों से भरा होता । यह फल मार्च से मई के बीच पक करनीचे गिरने लगते हैं। फलों के गूदे का शरबत बनाकर पीया जाता हैं। जिसमें प्रचुर मात्रा में बिटामिन c पाया जाता है। बेल का शरबत कई प्रकार के रोगों में फायदेमंद सावित होता है। यह शरीर की आंतरिक गर्मी को दूर करता है। मुंह के छालों को मिटाने के लिये भी इसका जूस लिया जाता है। पेचिस या दस्तों को रोकने व गैस एवं एसिडिटी को ...